राधारमणपदाम्बृज-मधुरिमसिन्धोरनन्तपारस्य।
अनुभवितैकः स परं वृन्दारण्यं भजेत योऽनन्यः।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.5)
जो अनन्यभाव से श्रीवृन्दावन का भजन करता है, एकमात्र वही श्रीराधारमण के चरण-कमलों के अपार माधुर्य-सिन्धु का अनुभव प्राप्त कर सकता है।
अनुभवितैकः स परं वृन्दारण्यं भजेत योऽनन्यः।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.5)
जो अनन्यभाव से श्रीवृन्दावन का भजन करता है, एकमात्र वही श्रीराधारमण के चरण-कमलों के अपार माधुर्य-सिन्धु का अनुभव प्राप्त कर सकता है।

