त्रिंशद् वर्ष सहस्राणि त्रिंशद् वर्ष शतानि च - स्कन्द पुराण (2.17.22)

त्रिंशद् वर्ष सहस्राणि त्रिंशद् वर्ष शतानि च - स्कन्द पुराण (2.17.22)

त्रिंशद् वर्ष सहस्राणि त्रिंशद् वर्ष शतानि च ।
यत्फलं भारते वर्षे तत्फलं मथुरां स्मरन् ।।

- स्कन्द पुराण (2.17.22)

वंदनीय भारत भूमि में अनेकों वर्षों तक रहने से जो प्राप्त किया जा सकता है वह एक बार ब्रज मंडल को स्मरण करने से ही मिल जाता है।