जीवनि धन राधा वल्लभ लाल - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (44)

जीवनि धन राधा वल्लभ लाल - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (44)

॥दोहा॥
कृष्ण वल्लभा लाड़िली, राधा वल्लभ लाल।
बसहु निरन्तर हीय में, आनन्द रूप रसाल॥

॥पद॥
जीवनि धन राधा वल्लभ लाल।
कृष्ण वल्लभा रसिकिनि राधा वारिज बदनी बाल॥ [1]
जुगल किसोर किसोरी जोरी गोरी स्याम तमाल।
बसहु निरन्तर हियें श्रीहरिप्रिया आनन्द रूप रसाल॥ [2]

- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (44)

॥ दोहा ॥
हम यह प्रार्थना करते हैं कि कृष्ण-वल्लभा श्रीलाड़िलीजी और राधा-वल्लभ श्रीलालजी, जो परमानन्द, दिव्य रूप तथा रस-स्वरूप हैं, वे सदैव हमारे हृदयों में निवास करें।

॥पद॥
हमारे जीवन धन स्वरूप यह राधा वल्लभ लाल, और कृष्ण वल्लभा रसिकिनी कमल मुखी बाल श्रीराधा हैं। [1]
जुगल किशोर किशोरों की यह जोरी जो सदा गौर स्याम स्वरूपों से तमाल कञ्चन लता की तरह रहते हैं सदा हमारे हृदयों में निवास करें। श्रीहरि एवं प्रिया दोनों के विग्रह आनन्द, रूप तथा रस ही के गठित हैं। [2]