अन्योन्यहास परिहास विलास केली वृन्दावने वैचित्र्य जृम्भित महारस-वैभवेन ।
वृन्दावने विलसितापहृतं विदग्ध द्वन्द्वेन केनचिदहो हृदयं मदीयम्।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (49)
अहो परस्पर हास-परिहास युक्त विलास केली क्रीड़ाओं की विचित्रता से प्रवृद्ध (उमड़े हुए) महारस के वैभव के साथ श्रीवृन्दावन में विहार करने वाले किसी (अनिर्वचनीय) चतुर युगल द्वारा मेरा हृदय हरण कर लिया गया है।
वृन्दावने विलसितापहृतं विदग्ध द्वन्द्वेन केनचिदहो हृदयं मदीयम्।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (49)
अहो परस्पर हास-परिहास युक्त विलास केली क्रीड़ाओं की विचित्रता से प्रवृद्ध (उमड़े हुए) महारस के वैभव के साथ श्रीवृन्दावन में विहार करने वाले किसी (अनिर्वचनीय) चतुर युगल द्वारा मेरा हृदय हरण कर लिया गया है।

