नारायण हरि भजन में - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (41)

नारायण हरि भजन में - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (41)

नारायण हरि भजन में, तू जिन देर लगाय।
का जाने या देर में, स्वास रहै के जाय॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (41)

हे मन! यदि तू हरि-भजन में देर करेगा (अर्थात् उसे टालता रहेगा), तो कौन जानता है कि इस लापरवाही में तेरे प्राण रहें या न रहें।