कीरति कुंवरी लाड़िली राधा, सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा - श्री राधा चालीसा (17)

कीरति कुंवरी लाड़िली राधा, सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा - श्री राधा चालीसा (17)

कीरति कुंवरी लाड़िली राधा, सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा ।
नाम अमंगल मूल नसावन, त्रिविध ताप हर हरी मनभावन ।।
- श्री राधा चालीसा (17)

हे कीरति कुंवरी श्री राधा, आपके स्मरण से समस्त प्रकार की संसार की बाधा मिट जाती है। हे लाड़िली जू, आपका नाम अमंगल के मूल का नाश कर देता है, तीनों तापों को हरने वाला है तथा श्री हरि [कृष्ण]और हर [शिव] के मन को भाने वाला है।