कदा मधुर सारिका: स्वरस पद्यमध्यापय - त्प्रदाय कर तालिका: क्वचन् नर्त्तयत्केकिनम्।
क्वचित् कनक वल्लरीवृत तमाल लीलाधनं, विदग्ध मिथुनं तदद्भुतमुदेति वृन्दावने ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (221)
कभी मधुर - स्वरा सारिकाओं को निज रस सम्बन्धी पदों का अध्यापन कराते हुए, कभी ताली बजा-बजाकर मयूरों को नचाते हुए, तो कहीं कनक-लता से आवृत तमाल के लीला-धन से धनी चतुर युगल श्रीवृन्दावन में जगमगा रहे हैं ।
क्वचित् कनक वल्लरीवृत तमाल लीलाधनं, विदग्ध मिथुनं तदद्भुतमुदेति वृन्दावने ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (221)
कभी मधुर - स्वरा सारिकाओं को निज रस सम्बन्धी पदों का अध्यापन कराते हुए, कभी ताली बजा-बजाकर मयूरों को नचाते हुए, तो कहीं कनक-लता से आवृत तमाल के लीला-धन से धनी चतुर युगल श्रीवृन्दावन में जगमगा रहे हैं ।

