चलत फिरत सुनियत यहै - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (68)

चलत फिरत सुनियत यहै - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (68)

चलत फिरत सुनियत यहै, (श्री) राधाबलभलाल।
ऐसे वृन्दाविपिन में, बसत रहौ सब काल॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (68)

जहाँ चलते-फिरते “श्री राधावल्लभ लाल” का ही नाम सुनाई पड़ता है, ऐसे श्रीवृन्दावन में नित्य वास करना चाहिए।