हेम कौ सुमेर दान - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (30)

हेम कौ सुमेर दान - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (30)

हेम कौ सुमेर दान, रतन अनेक दान,
गज दान, अन्नदान, भूमि दान करहिं। [1]
मोतिनु के तुलादान, मकर प्रयाग-न्हान,
ग्रहन में कासी दान, चित्त सुद्ध धरहीं॥ [2]
सेजदान, कन्या दान, कुरुक्षेत्र गऊ दान,
इतने में पापनिं कौं नेकहूँ न हरहीं। [3]
कृष्ण केसरी कौ नाम, एक बार लीन्हें 'ध्रुव',
पापी तिहुँ लोकनि के छिन माँहि तरहीं॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, जीव दशा (30)

यदि कोई इस विश्वास से सुमेरु पर्वत के समान स्वर्ण-राशि का दान करे, मणि-माणिक्य, रत्न, गज-दान, अन्नदान और भूमिदान करे कि इससे पुण्य मिलेगा और पाप मुक्त होगा। [1]

या फिर मुक्ताराशि से अनेक तुलादान करे, प्रयाग जैसे तीर्थों में स्नान और काशी में ग्रहण के अवसर पर चित्त-शुद्धि हेतु अनेकों दान करे। [2]

शय्यादान, कन्यादान, और कुरुक्षेत्र में शुभ पर्व पर गो-दान करे, तो ये सभी पुण्य-कर्म करने के बाद भी वह अपने समस्त पापों से मुक्त नहीं हो पाता। [3]

श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि "केवल एक बार श्री कृष्ण के नाम का स्मरण करने से ही, त्रैलोक्य के समस्त पापी भी एक क्षण में संसार के आवागमन से मुक्त होकर परम गति को प्राप्त हो जाते हैं।" [4]