कठिन है रंग महलको रिझाइबौ (औ) सहचरि कहाइबौ।
यह सब छबि तबही फबि आवै, जब व्यासस्वामिनी के चरनकमलमकरॅद पाइबौ।।
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (88)
श्री राधा के महल की टहल पाना, एवं सहचरी बनना अत्यंत कठिन है। यह छवि एवं रस तभी फलीभूत होता है जब श्री स्वामिनी (राधारानी) के चरण कमल का मकरंद प्राप्त होता है (अर्थात श्रीजी के चरणों में अनन्य प्रेम हो जाता है ) ।
यह सब छबि तबही फबि आवै, जब व्यासस्वामिनी के चरनकमलमकरॅद पाइबौ।।
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (88)
श्री राधा के महल की टहल पाना, एवं सहचरी बनना अत्यंत कठिन है। यह छवि एवं रस तभी फलीभूत होता है जब श्री स्वामिनी (राधारानी) के चरण कमल का मकरंद प्राप्त होता है (अर्थात श्रीजी के चरणों में अनन्य प्रेम हो जाता है ) ।

