तजो गेह सुख देह के, और जगत के फंद । जुगल चरन सों प्रीति कर, बस वृंदावन चंद ।। - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (9) गृह सुख एवं जगत के फंदों को त्याग कर युगल चरणों से प्रीति कर श्री वृंदावन चंद में वास करना चाहिए