मैं काको जानो नहीं - ब्रज के दोहे

मैं काको जानो नहीं - ब्रज के दोहे

मैं काको जानो नहीं, ना मोहि जानें कोय।
तुमसो प्रीति लगी रहे, हम तुम जानें दोय॥
- ब्रज के दोहे

हे युगल सरकार! न मैं किसी और को जानूँ, न ही कोई मुझे जाने। बस मेरी प्रीति सदा आपसे ही जुड़ी रहे और मैं केवल आपको ही जानूँ।