मैं काको जानो नहीं, ना मोहि जानें कोय। तुमसो प्रीति लगी रहे, हम तुम जानें दोय॥ - ब्रज के दोहे हे युगल सरकार! न मैं किसी और को जानूँ, न ही कोई मुझे जाने। बस मेरी प्रीति सदा आपसे ही जुड़ी रहे और मैं केवल आपको ही जानूँ।