गो कोटि दानं ग्रहणेषु काशी , प्रयाग गंगा युत कल्प वास:।
यज्ञागतं मेरु सुवर्ण दानं , गोविंद नाम्ना न कदापि तुल्यम्।।
- स्कन्द पुराण
यदि पूर्ण ग्रहण के अवसर पर काशी धाम में एक करोड़ स्वर्ण मढ़ी सींग वाली गउएँ दान की जायें, दस हज़ार वर्ष तक प्रयाग में कल्प वास किया जाये और यज्ञ करके सुमेरु [सोने] के पर्वत को ही दान कर दिया जाए, और इन सब के फल को एक पलड़े [तराज़ू] में रख दिया जाये और एक 'गोविंद नाम' को दूसरे पलड़े में रख दिया जाये तो भी एक गोविंद नाम भारी पड़ेगा । अर्थात यदि जीव भगवन नाम लेता है तो दान, धर्म, व्रत इत्यादि की तुलना उस नाम के समक्ष करना भी अपराध है ।
यज्ञागतं मेरु सुवर्ण दानं , गोविंद नाम्ना न कदापि तुल्यम्।।
- स्कन्द पुराण
यदि पूर्ण ग्रहण के अवसर पर काशी धाम में एक करोड़ स्वर्ण मढ़ी सींग वाली गउएँ दान की जायें, दस हज़ार वर्ष तक प्रयाग में कल्प वास किया जाये और यज्ञ करके सुमेरु [सोने] के पर्वत को ही दान कर दिया जाए, और इन सब के फल को एक पलड़े [तराज़ू] में रख दिया जाये और एक 'गोविंद नाम' को दूसरे पलड़े में रख दिया जाये तो भी एक गोविंद नाम भारी पड़ेगा । अर्थात यदि जीव भगवन नाम लेता है तो दान, धर्म, व्रत इत्यादि की तुलना उस नाम के समक्ष करना भी अपराध है ।

