(राग मल्हार)
आज हों देखे कुँवर कन्हाई ।
प्रातः समे निकसे गायन संग श्याम घटा जुरि आई ।। [1]
पीत वसन पहरे तन सुन्दर कुसुमी पाग सुहाई |
मुक्ता माल सोहत उर ऊपर मुरली मधुर बजाई ।। [2]
कहा कहौं अंग अंग की शोभा मोपे बरनी न जाई ।
श्री विट्ठल गिरिधर देखेतें क्यों हूँ कल न पराई ।। [3]
- श्री विट्ठल दास
आज मैंने कुंवर कन्हैया श्री कृष्ण का दर्शन प्राप्त किया है ।सुबह सुबह वह अपनी गायों के संग निकले, और आकाश में भी काले बादल छा गए । [1]
श्री कृष्ण ने शरीर पर सुंदर पीले वस्त्र एवं शीर्ष पर सुंदर कुसुम रंग की पगड़ी धारण की हुई थी । वह मुक्तों की सुंदर माला धारण कर सुंदर मुरली बजा रहे थे ।[2]
क्या कहा जाए, श्री कृष्ण के अंग अंग की शोभा का वर्णन करना असम्भव [अद्वितीय] है। श्री विट्ठल दास जी कामना करते हैं कि समय यहीं ठहर जाए, जिससे इस सुंदर छवि का वियोग उन्हें कभी भी प्राप्त न हो । [3]
आज हों देखे कुँवर कन्हाई ।
प्रातः समे निकसे गायन संग श्याम घटा जुरि आई ।। [1]
पीत वसन पहरे तन सुन्दर कुसुमी पाग सुहाई |
मुक्ता माल सोहत उर ऊपर मुरली मधुर बजाई ।। [2]
कहा कहौं अंग अंग की शोभा मोपे बरनी न जाई ।
श्री विट्ठल गिरिधर देखेतें क्यों हूँ कल न पराई ।। [3]
- श्री विट्ठल दास
आज मैंने कुंवर कन्हैया श्री कृष्ण का दर्शन प्राप्त किया है ।सुबह सुबह वह अपनी गायों के संग निकले, और आकाश में भी काले बादल छा गए । [1]
श्री कृष्ण ने शरीर पर सुंदर पीले वस्त्र एवं शीर्ष पर सुंदर कुसुम रंग की पगड़ी धारण की हुई थी । वह मुक्तों की सुंदर माला धारण कर सुंदर मुरली बजा रहे थे ।[2]
क्या कहा जाए, श्री कृष्ण के अंग अंग की शोभा का वर्णन करना असम्भव [अद्वितीय] है। श्री विट्ठल दास जी कामना करते हैं कि समय यहीं ठहर जाए, जिससे इस सुंदर छवि का वियोग उन्हें कभी भी प्राप्त न हो । [3]

