व्यास न तासु प्रीति करि - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (116)

व्यास न तासु प्रीति करि - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (116)

व्यास न तासु प्रीति करि, जाहि आपनी पीर। 
पर पीरक सौं प्रीति करु, दुःख सहि मेटै भीर॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (116)

श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि उस व्यक्ति से प्रीति (प्रेम) न करो जिसे केवल अपनी ही पीड़ा और स्वार्थ की चिंता रहती है। इसके विपरीत, उस करुणामय प्रभु अथवा संतों से प्रेम करो जो दूसरों के दुखों को हरने वाले हैं। वे स्वयं कष्ट सहकर भी अपने दूसरों के संकटों और भयों को मिटा देते हैं।