(राग कान्हरौ)
आवत जात बजावत नूपुर।
मेरौ तेरौ न्याव दई के आगैं
जो कुछ करौ सो हमारे सिर ऊपर॥ [1]
निपट निकट मवास ह्वै रही प्यारी पैंड दूपर।
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
बिलसत निहचल धूपर॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (8)
निकुंज महल में सुंदर सेज शोभायमान है, श्री प्यारी जू आते जाते सुंदर मधुर नूपुरों की धवनि सुन श्री कुंज बिहारी की केली विलास की इच्छा तीव्र हुई। श्री कुंज बिहारी बोले: मेरी इच्छा है कि आप मेरे संग केली विलास करें, बाक़ी आपकी जैसे भी इच्छा हो वह हमारे सिर ऊपर (मुझे स्वीकार है ) । [1]
मेरे हृदय में अपने सुंदर चरण कमल रख, नुपुर बजाकर केली विलास आरम्भ करें, मेरी इस वेदना को समझें ।
श्री हरिदासी [ललिता सखी] कहती हैं कि इस प्रकार श्री कुंज बिहारी श्री राधा जू से प्राथना करते हैं कि हे प्यारी ! तुम्हारा विहार अटल है, सदा सर्वोपरि है, आप सर्वसमर्थ हैं कृपया विहार आरम्भ करें । कुंज बिहारी जी की प्रार्थना सुन प्रिया जी रीझ गयी, एवं प्रिया जी ने सर्वोपरि रस बरसाया। [2]
आवत जात बजावत नूपुर।
मेरौ तेरौ न्याव दई के आगैं
जो कुछ करौ सो हमारे सिर ऊपर॥ [1]
निपट निकट मवास ह्वै रही प्यारी पैंड दूपर।
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
बिलसत निहचल धूपर॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (8)
निकुंज महल में सुंदर सेज शोभायमान है, श्री प्यारी जू आते जाते सुंदर मधुर नूपुरों की धवनि सुन श्री कुंज बिहारी की केली विलास की इच्छा तीव्र हुई। श्री कुंज बिहारी बोले: मेरी इच्छा है कि आप मेरे संग केली विलास करें, बाक़ी आपकी जैसे भी इच्छा हो वह हमारे सिर ऊपर (मुझे स्वीकार है ) । [1]
मेरे हृदय में अपने सुंदर चरण कमल रख, नुपुर बजाकर केली विलास आरम्भ करें, मेरी इस वेदना को समझें ।
श्री हरिदासी [ललिता सखी] कहती हैं कि इस प्रकार श्री कुंज बिहारी श्री राधा जू से प्राथना करते हैं कि हे प्यारी ! तुम्हारा विहार अटल है, सदा सर्वोपरि है, आप सर्वसमर्थ हैं कृपया विहार आरम्भ करें । कुंज बिहारी जी की प्रार्थना सुन प्रिया जी रीझ गयी, एवं प्रिया जी ने सर्वोपरि रस बरसाया। [2]

