जे रसिकन उर नित बसें, निगमागम को सार।
नारायण तिन चरण की, बार बार बलिहार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (121)
जिन रसिकों के हृदय में आगम-निगम का सारस्वरूप यह युगल-दम्पति का नित्य-विहार-रस बसा हुआ है, ऐसे रसिकों के श्रीचरणों में बारम्बार बलिहार है।
नारायण तिन चरण की, बार बार बलिहार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (121)
जिन रसिकों के हृदय में आगम-निगम का सारस्वरूप यह युगल-दम्पति का नित्य-विहार-रस बसा हुआ है, ऐसे रसिकों के श्रीचरणों में बारम्बार बलिहार है।

