सखी भाव का प्रादुर्भाव - नारद पुराण

सखी भाव का प्रादुर्भाव - नारद पुराण

सत्यं सत्यं पुनः सत्यं सत्यमेव पुनः पुनः ।
बिना राधा प्रसादेन मत्प्रसादो न विद्यते ॥
श्रीराधिकाया कारुण्यात् तत्सखी संगितामियात् ।
तत्सखीनां कृपया योषिदंगमवाप्नुयात् ॥

- नारद पुराण
 
श्री कृष्ण नारद से कहते हैं: मैं यह बार बार शपथ लेकर कहता हूँ बिना राधिका जी की कृपा के मेरी कृपा नहीं हो सकती है । श्रीराधिका की अहेतु की कृपा से ही उनकी सखियों का संग प्राप्त होता है। उन सखियों की कृपा से ही सखी भाव मिलता है । इसी क्रम से ही केवल सखी भाव को प्राप्त किया जा सकता है, अन्य कोई उपाय नहीं है ।