(राग सारंग, इकताला)
रँगीली जोरी की बलि जाँव, ललित रूप-गुन-रासि ।
कदम-मूल बन घर है जाको जमुना-कुल सुठाँव । [1]
गोरी साँवरी दृगनि भाँवरी निरखें सुखनि सिहाँव ।
आनँदघन जीवन-धन-दायक राधा-मोहन नाँव ।। [2]
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (795)
श्री आनंदघन कह रहे है "ललित रूप - गुण की राशि, रँगीली जोरी श्री श्यामा कुंजबिहारी की बलिहारी है, जो सदैव यमुना किनारे कदम्ब लताओं के वन में विहार परायण हैं ”। [1]
श्री गोरी साँवरी जोरि आँखों को बहुत भाती है जिनके दर्शन से सुख प्राप्त होता है तथा ह्रदय मुग्ध हो जाता है। श्री राधा मोहन का नाम ही मेरे जीवन का वास्तविक धन एवं संजीवनी है। [2]
रँगीली जोरी की बलि जाँव, ललित रूप-गुन-रासि ।
कदम-मूल बन घर है जाको जमुना-कुल सुठाँव । [1]
गोरी साँवरी दृगनि भाँवरी निरखें सुखनि सिहाँव ।
आनँदघन जीवन-धन-दायक राधा-मोहन नाँव ।। [2]
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, पदावली (795)
श्री आनंदघन कह रहे है "ललित रूप - गुण की राशि, रँगीली जोरी श्री श्यामा कुंजबिहारी की बलिहारी है, जो सदैव यमुना किनारे कदम्ब लताओं के वन में विहार परायण हैं ”। [1]
श्री गोरी साँवरी जोरि आँखों को बहुत भाती है जिनके दर्शन से सुख प्राप्त होता है तथा ह्रदय मुग्ध हो जाता है। श्री राधा मोहन का नाम ही मेरे जीवन का वास्तविक धन एवं संजीवनी है। [2]

