अपि तुच्छलोकंरजन-मासंजनमत्र - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.89)

अपि तुच्छलोकंरजन-मासंजनमत्र - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.89)

अपि तुच्छलोकंरजन-मासंजनमत्र-विड्भाण्डे। 
प्रिय! वृन्दावनजीवन जनसंगं स्वार्थ भंजनं मुंज।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.89)

हे प्रिय! हे वृन्दावन जीवन!! अति तुच्छ लोक-रंजन एवं इस विष्ठापात्र-शरीर मे आसक्त तथा स्वार्थ-नाश करने वाले लोगों का संग त्याग कर।