तिनहूँ कौ सार आली श्रीगुरु सिखायौ

तिनहूँ कौ सार आली श्रीगुरु सिखायौ

तिनहूँ कौ सार आली श्रीगुरु सिखायौ जिन,
"प्रेमसखी" राधा-महामंत्र उर नाख्यौ है ।।
- श्री प्रेमदासजी [श्री लाल बलबीर जी के भ्राता]

श्री प्रेमदास जी कहते हैं कि: हे सखी,  सार स्वरूप, जो हमारे गुरु जी ने सिखाया है वह “राधा” महामंत्र को हृदय में हम नित्य ही धारण करते हैं [जो सबका सार है मानो] ।