दीजै मौकों श्रीवृन्दावन बास ।
कुमर किसोरी गोरी भोरी करुनानिधि सुख रास ।। [1]
सैन बैन रस दैन जुगल वर लखौ परसपर हास ।
दासी दीन परी द्वारे पै पूजौ मन की आस ।। [2]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (60)
हे कुंवर किशोरी, गोरी, करुनानिधि भोरी सरकार, कृपया मुझे वृंदावन का वास दीजिए । [1]
ऐसी करुणा कीजिए जिससे युगल वर [राधा कृष्ण] सैन [संकेतों] एवं बैन [बोलनी] द्वारा हास परिहास में जो अद्भुत रस प्रदान कर रहे हैं उसका मैं भी पान कर सकूँ। श्री लाल बलबीर जी कहते हैं कि हे स्वामिनी जी यह दासी आपके द्वारे पर प्रार्थना कर रही है, कृपया अब मेरे इस मन की आस को पूर्ण कीजिए । [2]
कुमर किसोरी गोरी भोरी करुनानिधि सुख रास ।। [1]
सैन बैन रस दैन जुगल वर लखौ परसपर हास ।
दासी दीन परी द्वारे पै पूजौ मन की आस ।। [2]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (60)
हे कुंवर किशोरी, गोरी, करुनानिधि भोरी सरकार, कृपया मुझे वृंदावन का वास दीजिए । [1]
ऐसी करुणा कीजिए जिससे युगल वर [राधा कृष्ण] सैन [संकेतों] एवं बैन [बोलनी] द्वारा हास परिहास में जो अद्भुत रस प्रदान कर रहे हैं उसका मैं भी पान कर सकूँ। श्री लाल बलबीर जी कहते हैं कि हे स्वामिनी जी यह दासी आपके द्वारे पर प्रार्थना कर रही है, कृपया अब मेरे इस मन की आस को पूर्ण कीजिए । [2]

