आज बन झूलत नटवर लाल - श्री विट्ठल दास

आज बन झूलत नटवर लाल - श्री विट्ठल दास

(राग मल्हार)
आज बन झूलत नटवर लाल ।
संग झूलत वृषभानु नंदिनी बोलत वचन रसाल ।। [1]
तेसोई गान करत अति सुन्दर चंचल नयन विशाल ।
मल्लिकाछ अरु शीश टिपारो अरु गुंजन की माल ।। [2]
कहिये कहा कहत नहीं आवे शोभा भई अति भारी ।
श्रीविठ्ठल गिरिधरन लाल पर तनमन डारत वारी ।। [3]

- श्री विट्ठल दास

आज वन में श्री नटवर लाल [श्री कृष्ण] झूला झूल रहे हैं । उनके संग श्री वृषभानु नंदिनी श्री राधिका झूल रही हैं एवं दोनों सुंदर रसीले वचनों द्वारा वार्ता कर रहे हैं । [1]

साथ साथ वह सुंदर गान भी कर रहे हैं जिससे उनके विशाल चंचल नयनों की शोभा देखते ही बनती है । श्री कृष्ण ने सुंदर मल्लकाछ, शीश पर अति सुंदर पगड़ी, एवं गले में गुंजों की माला धारण की हुई है । [2]

श्री वीट्ठल दास जी कहते हैं कि श्री कृष्ण की अद्भुत शोभा विलक्षण है एवं वाणी से वर्णन करना असंभव है, ऐसे श्री गिरिधर लाल पर अपने तन मन प्राणों को बलिहार करता हूँ  । [3]