प्रेम प्रेम सब कोऊ कहत, प्रेम न जानत कोय।
जो जन जाने प्रेम तो, मरे जगत क्यों रोय॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (2)
सब साधक कहते हैं कि हमें "भगवान से प्रेम है, हम तो भगवान के अनन्य प्रेमी हैं", परन्तु प्रेम क्या है, यह कोई नहीं जानता। जो वास्तविक प्रेम करना जानता है, वह संसार के छिन जाने पर भला क्यों रोएगा?
जो जन जाने प्रेम तो, मरे जगत क्यों रोय॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (2)
सब साधक कहते हैं कि हमें "भगवान से प्रेम है, हम तो भगवान के अनन्य प्रेमी हैं", परन्तु प्रेम क्या है, यह कोई नहीं जानता। जो वास्तविक प्रेम करना जानता है, वह संसार के छिन जाने पर भला क्यों रोएगा?

