बलि बलि जाऊँ राधा मोहिं रहन दै वृंदावन की सरन ।
मोकौ ठौर न और कहूं, अब सेऊंगौ ये चरन ।।
- श्री हरिराम व्यास (व्यास वाणी), पूर्वार्ध (292)
श्री हरिराम व्यास जी (विशाखा सखी अवतार) श्री राधारानी से प्रार्थना कर रहे हैं, हे किशोरीजी मैं आपकी बार बार बलिहार जा रहा हूँ, आप मुझे अपने निज महल वृन्दावन की शरण में ही रखिये।
आपके चरण कमल को छोड़कर मेरा न तो और कोई सहारा है और न ही कोई और निवास है।
मोकौ ठौर न और कहूं, अब सेऊंगौ ये चरन ।।
- श्री हरिराम व्यास (व्यास वाणी), पूर्वार्ध (292)
श्री हरिराम व्यास जी (विशाखा सखी अवतार) श्री राधारानी से प्रार्थना कर रहे हैं, हे किशोरीजी मैं आपकी बार बार बलिहार जा रहा हूँ, आप मुझे अपने निज महल वृन्दावन की शरण में ही रखिये।
आपके चरण कमल को छोड़कर मेरा न तो और कोई सहारा है और न ही कोई और निवास है।

