(राग मल्हार)
देखो माई ये बड़भागी मोर ।
जिनके पंख को मुकुट धरत हैं नटवर नंद किशोर ।। [1]
बड़भागी है नन्द यसोदा पुन्य किये झकझोर ।
वृन्दावन हम क्यों न भई रज लागत पग की कोर ।। [2]
ब्रह्मादिक सनकादिक नारद ठाड़े रहें कर जोर ।
सूरदास सन्तन को सरबस देखियत माखन चोर ।। [3]
- श्री सूरदास
हे सखी! उन अति भाग्यशाली मोरों को देखो जिनके पंखों से नन्दनन्दन ने अपना मुकुट सजाया है। [1]
श्री कृष्ण के पिता महाराज नंद तथा उनकी माता श्री यशोदाजी भी कितनी भाग्यशाली हैं, उन्होंने बहुत पुण्य किये होंगे। मुझे वृंदावन की रज क्यूँ नहीं बना दिया जिससे श्री कृष्ण के चरण की कोर मुझ पर पड़ती? [2]
श्री सूरदास कहते हैं "सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, सनकादि और नारदादि परम वैष्णव भक्त भी प्रार्थना में हाथ जोड़कर खड़े हैं, जो संतो के लिए उनके सर्वस्व हैं उस माखन चोर श्रीकृष्ण को निहार रहे हैं।" [3]
देखो माई ये बड़भागी मोर ।
जिनके पंख को मुकुट धरत हैं नटवर नंद किशोर ।। [1]
बड़भागी है नन्द यसोदा पुन्य किये झकझोर ।
वृन्दावन हम क्यों न भई रज लागत पग की कोर ।। [2]
ब्रह्मादिक सनकादिक नारद ठाड़े रहें कर जोर ।
सूरदास सन्तन को सरबस देखियत माखन चोर ।। [3]
- श्री सूरदास
हे सखी! उन अति भाग्यशाली मोरों को देखो जिनके पंखों से नन्दनन्दन ने अपना मुकुट सजाया है। [1]
श्री कृष्ण के पिता महाराज नंद तथा उनकी माता श्री यशोदाजी भी कितनी भाग्यशाली हैं, उन्होंने बहुत पुण्य किये होंगे। मुझे वृंदावन की रज क्यूँ नहीं बना दिया जिससे श्री कृष्ण के चरण की कोर मुझ पर पड़ती? [2]
श्री सूरदास कहते हैं "सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, सनकादि और नारदादि परम वैष्णव भक्त भी प्रार्थना में हाथ जोड़कर खड़े हैं, जो संतो के लिए उनके सर्वस्व हैं उस माखन चोर श्रीकृष्ण को निहार रहे हैं।" [3]

