लाल ही लाल के लाल ही लोचन - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

लाल ही लाल के लाल ही लोचन - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

(राग धनाश्री)
लाल ही लाल के लाल ही लोचन,
लालन के मुख लाल ही बीरा। [1]
लाल बनी कटि काछनी लाल की,
अरु लाल के सीस पे लाल ही चीरा। [2]
लाल ही बाग बने अति सुन्दर,
लाल खड़े जमुना जी के तीरा। [3]
गोविन्द यों प्रभु सोभा बखानत,
लाल के कण्ठ बिराजत हीरा। [4]

- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

लाल जी [श्री कृष्ण] की आँखें लाल हैं और उनके मुख में लाल पान का बीड़ा है। [1]
लाल जी की कमर में लाल कछनी बँधी है और सिर पर लाल वस्त्र बँधा है। [2]
लाल जी यमुना के तट पर अति सुन्दर लाल बगीचे में खड़े हैं। [3]
श्री गोविन्द दास प्रभु की शोभा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि उन लाल के गले में हीरों की माला बिराजित है। [4]