कुंज विहारी हमारो है जीवन - श्री सरस माधुरी

कुंज विहारी हमारो है जीवन - श्री सरस माधुरी

(सवैया)
कुंज विहारी हमारो है जीवन, कुंज विहारिन है सर्वष मेरी। [1] 
कुंज विहारी है इष्ट अनुपम, कुंज विहारिन की है नित चेरी॥ [2]
कुंज विहारी के नाम जपौं मुख, ध्यान धरौं उर सांझ सवेरी। [3]
कुंज विहारी बिहारिन राधिका, सरस नैंन में आय बसेरी॥ [4]
- श्री सरस माधुरी

कुंज बिहारी ही मेरे प्राण हैं, और श्री कुंज बिहारीणी ही मेरा सर्वस्व। [1]

कुंज बिहारी ही मेरे अनुपम इष्ट हैं, और श्री कुंज बिहारीणी की ही मैं नित्य दासी हूं। [2]

प्रातः से सायं तक, अनन्य भाव से मैं श्री कुंज बिहारी और कुंज बिहारिणी का ही नाम जप और ध्यान करती हूँ। [3]

श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि मेरे नयनों में श्री कुंज बिहारी एवं बिहारिणी सदा निवास करते हैं। [4]