धर्म मिट्यौ अब कृपा करि, दई भजन रसरीति।
रसिक कुंवर दोउ लाड़िले, व्यासहि बाढ़ी प्रीति॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (12)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि प्रभु की अपार कृपा से अब मेरे हृदय से कर्मकांडीय धर्म का अहंकार मिट गया है और मुझे 'भजन-रस' की वास्तविक रीति प्राप्त हो गई है। अब तो उन परम रसिक लाड़िले युगल (श्री राधा-कृष्ण) के प्रति मेरी प्रीति निरंतर बढ़ती ही जा रही है, और अन्य सब बंधन छूट गए हैं।
रसिक कुंवर दोउ लाड़िले, व्यासहि बाढ़ी प्रीति॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (12)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि प्रभु की अपार कृपा से अब मेरे हृदय से कर्मकांडीय धर्म का अहंकार मिट गया है और मुझे 'भजन-रस' की वास्तविक रीति प्राप्त हो गई है। अब तो उन परम रसिक लाड़िले युगल (श्री राधा-कृष्ण) के प्रति मेरी प्रीति निरंतर बढ़ती ही जा रही है, और अन्य सब बंधन छूट गए हैं।

