बाँकी चारु चन्द्रिका बिराजै भाल बाँकी खौर,
बाँकी भौहें चंचल चितौन चख बाँकी है। [1]
बाँकी नखबैसर मधुर मुसिकान बाँकी,
कहैं हनुमान बाँकी अधर ललाकी है॥ [2]
मुख शशि भूषण श्रृंगार चन्द्रकला कीन्हैं,
बाँकी पर्यक बैठी मूर झरना की है। [3]
झुकि झुकि झूमि झूमि झाँकी करै देव वधु,
कैसी ये अनुपम श्री राधिका की झाँकी है ।। [4]
- रसिक वाणी
श्री राधा के सिर पर सुंदर चंद्रिका विराजमान है, उनके माथे पर सुन्दर चंदन का लेप है। उनकी भौहें चंचल एवं आकर्षक हैं और उसकी आँखों अत्यंत तिरछी एवं मोहिनी हैं । [1]
श्री राधा की नथ बेसर अत्यंत सुन्दर है और उनकी मुस्कान बाँकी है। उनके होंठों की लालिमा अत्यंत लुभावनी है । [2]
श्री राधा का मनमोहक चेहरा चंद्र समान है और उनके श्रृंगार के गहने इत्यादि ऐसे प्रतीत हो रहे हैं जैसे चंद्र के टुकड़ों से बने हुए हों। जब श्री राधा अपने सिंहासन पर विराजमान होती हैं ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रेम का सार ही विराजमान हो गया हो । [3]
समस्त देव वधुएँ एवं स्वर्ग की अप्सराएँ इत्यादि चुपके से श्री राधा की झांकी को निहार रही हैं, यह अद्बुत श्री राधिकारानी की झांकी बहुत ही अनुपम है।" [4]
बाँकी भौहें चंचल चितौन चख बाँकी है। [1]
बाँकी नखबैसर मधुर मुसिकान बाँकी,
कहैं हनुमान बाँकी अधर ललाकी है॥ [2]
मुख शशि भूषण श्रृंगार चन्द्रकला कीन्हैं,
बाँकी पर्यक बैठी मूर झरना की है। [3]
झुकि झुकि झूमि झूमि झाँकी करै देव वधु,
कैसी ये अनुपम श्री राधिका की झाँकी है ।। [4]
- रसिक वाणी
श्री राधा के सिर पर सुंदर चंद्रिका विराजमान है, उनके माथे पर सुन्दर चंदन का लेप है। उनकी भौहें चंचल एवं आकर्षक हैं और उसकी आँखों अत्यंत तिरछी एवं मोहिनी हैं । [1]
श्री राधा की नथ बेसर अत्यंत सुन्दर है और उनकी मुस्कान बाँकी है। उनके होंठों की लालिमा अत्यंत लुभावनी है । [2]
श्री राधा का मनमोहक चेहरा चंद्र समान है और उनके श्रृंगार के गहने इत्यादि ऐसे प्रतीत हो रहे हैं जैसे चंद्र के टुकड़ों से बने हुए हों। जब श्री राधा अपने सिंहासन पर विराजमान होती हैं ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रेम का सार ही विराजमान हो गया हो । [3]
समस्त देव वधुएँ एवं स्वर्ग की अप्सराएँ इत्यादि चुपके से श्री राधा की झांकी को निहार रही हैं, यह अद्बुत श्री राधिकारानी की झांकी बहुत ही अनुपम है।" [4]

