न दृष्टा मथुरा येन दिदृक्षा यस्य जायते - स्कंद पुराण (2.5.17.29)

न दृष्टा मथुरा येन दिदृक्षा यस्य जायते - स्कंद पुराण (2.5.17.29)

न दृष्टा मथुरा येन दिदृक्षा यस्य जायते ।
यत्र तत्र मृतस्याऽपि माथुरे जन्म जायते ।।

- स्कंद पुराण (2.5.17.29)

यदि ब्रज के दर्शन करने की इच्छा रखने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा पूरी होने से पहले ही प्राण त्याग देता है, तो वह निश्चित ही वह पुनः ब्रज में जन्म लेगा जिसमें कोई संदेह नहीं है।