मैं नहीं देखूँ और को, मोय न देखे और।
मैं नित देखोई करूँ, तुम दोऊनि सब ठौर॥
- ब्रज के दोहे
न मैं किसी और को देखूँ, न ही कोई मुझे देखे; मैं तो केवल नित्य तुम दोनों [श्री राधा-कृष्ण] को ही सर्वत्र देखा करूँ।
मैं नित देखोई करूँ, तुम दोऊनि सब ठौर॥
- ब्रज के दोहे
न मैं किसी और को देखूँ, न ही कोई मुझे देखे; मैं तो केवल नित्य तुम दोनों [श्री राधा-कृष्ण] को ही सर्वत्र देखा करूँ।

