लाडिली अलबेली हमारी ।
मंद मंद मुसिक्याइ छबीली कृपा दृष्टि निहारी । [1]
हित के हित सों मिलि बिहरत सहज लाल उर हारी ।
श्री हरिदास रसिक की जीवन प्राननि हूँ ते प्यारी ।। [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (52)
हमारी श्री लाडिली [राधा] अलबेली सरकार हैं । वह मंद मंद मुस्कुरा कर कृपा दृष्टि से निहारकर हमें निहाल कर देती हैं । [1]
श्री लाल जी [श्री कृष्ण] के उर के हार के समान वह नित्य ही श्री लाल जी संग प्रेम विहार परायण हैं । श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि श्री राधा ही श्री स्वामी हरिदास जी महाराज की जीवन एवं प्राणों से भी अधिक प्यारी हैं । [2]
मंद मंद मुसिक्याइ छबीली कृपा दृष्टि निहारी । [1]
हित के हित सों मिलि बिहरत सहज लाल उर हारी ।
श्री हरिदास रसिक की जीवन प्राननि हूँ ते प्यारी ।। [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (52)
हमारी श्री लाडिली [राधा] अलबेली सरकार हैं । वह मंद मंद मुस्कुरा कर कृपा दृष्टि से निहारकर हमें निहाल कर देती हैं । [1]
श्री लाल जी [श्री कृष्ण] के उर के हार के समान वह नित्य ही श्री लाल जी संग प्रेम विहार परायण हैं । श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि श्री राधा ही श्री स्वामी हरिदास जी महाराज की जीवन एवं प्राणों से भी अधिक प्यारी हैं । [2]

