सेयं दीक्षा उच्चभावै र्व्रतेषु सेयं शिक्षा राधिकाराधनेषु।
सेयं प्रेमाधीश पूर्म्मूलकक्षायच्छ्री वृन्दारण्य सौभाग्य वीक्षा।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.11)
श्रीवृन्दारण्य की सौभाग्यमय दर्शन-इच्छा ही उच्चतम भावयुक्त व्रतसमूहों में दीक्षा, एवं श्री राधिका की आराधनाओं में परम आज्ञा है तथा प्रेम के ईश्वर के महल का सबसे मूल [भीतरी] कक्ष है।
सेयं प्रेमाधीश पूर्म्मूलकक्षायच्छ्री वृन्दारण्य सौभाग्य वीक्षा।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.11)
श्रीवृन्दारण्य की सौभाग्यमय दर्शन-इच्छा ही उच्चतम भावयुक्त व्रतसमूहों में दीक्षा, एवं श्री राधिका की आराधनाओं में परम आज्ञा है तथा प्रेम के ईश्वर के महल का सबसे मूल [भीतरी] कक्ष है।

