तेरे नैन सावन की कारी अंधियारी घटा - श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक कवित्त

तेरे नैन सावन की कारी अंधियारी घटा - श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक कवित्त

(कवित्त)
तेरे नैन सावन की कारी अंधियारी घटा,
ता ऊपर मेरे नैंन घटा घनघोर है। [1]
तेरे नैन कलि मैं कल्प वृक्ष प्रगटे आय
ता ऊपर मेरे नैन बिच बिच मोर है॥ [2]
तेरे नैन उड़गति सी ऊची उतंग भरै,
ता ऊपर मेरे नैंन चंद्र चकोर है। [3]
तेरे नैन मेरे नैन मेरे नैन तेरे नैन,
मेरे नैन चोरिवे को तेरे नैन चोर है॥ [4]

- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक कवित्त

श्री राधा श्री कृष्ण से कहती हैं: तुम्हारी आँखें यदि श्रावण महीने की वर्षा वाले काले बादलों की तरह हैं, तो मेरे नैन उनके ऊपर भारी गरजने वाले घनघोर बादल के समान हैं। [1]

तुम्हारी आँखें यदि इस कलिकाल में कल्पवृक्ष हैं, तो मेरे नैन उस कल्पवृक्ष के ऊपर बैठे हुए मोर के समान हैं। [2]

तुम्हारी आँखें यदि ऊपर आकाश में उज्ज्वल चंद्रमा की तरह हैं, तो मेरे नैन चकोर पक्षी हैं जो उस चंद्रमा की किरणों के इंतजार में बैठता है। [3]

तेरे नैन मेरे नैन हैं, और मेरे नैन तेरे नैन हैं, मेरे नैनों को ठगने के लिए तेरे नैन ठग [लुटेरे] हैं। [4]