सिर काटो छेदो हियो - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (32)

सिर काटो छेदो हियो - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (32)

सिर काटो छेदो हियो, टूक टूक कर देहु।
पर जाके बदले विहँस, वाह वाह ही लेहु॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (32)

चाहे मेरा सिर काट दिया जाए, मेरे हृदय को छेद दिया जाए या मेरे शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएँ; परन्तु यदि इसके बदले मेरे श्यामसुंदर की प्रसन्नता प्राप्त हो, तो मैं उस कार्य पर विभोर होकर ‘वाह-वाह’ ही करूँगा।