(राग धनाश्री)
रुचिसों जेंवत जुगल किशोर।
होंस विनोद करत हैं बहुविधि देत परस्पर कोर। [1]
जो भावे सो लेत हैं दोऊ ललितादिक त्रन तोर।
सूरदास यह सोभा ऊपर देत हैं प्रान अकोर । [2]
- श्री सूरदास
दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण आज भोजन पान कर रहे हैं। आज वह हंसी विनोद करते हुए एक दूसरे को अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ खिला रहे हैं। [1]
जो जो उनको भाता है वह वही पान कर रहे हैं, जिसे देख ललितादिक सखियां प्रेम विभोर अपने प्राणों को न्यौछावर कर रही हैं। श्री सूरदास जी इस छवि को देख अपने जीवन प्राणों को न्यौछावर कर रहे हैं। [2]

