आरती युगल किशोर की - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (380)

आरती युगल किशोर की - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (380)

(राग गोरी)
आरती युगल किशोर की कीजै। 
तन मन धन न्योछावर दीजै ।।[1] 
गौर श्याम मुख निरखत जीजै।
प्रेम स्वरूप नयन भर पीजै।। [2] 
रवि शशि कोटि वदन की शोभा। 
ताहि देखत मेरौ मन लोभा।। [3]
नंद नंदन वृषभानु किशोरी। 
परमानन्द प्रभु अविचल जोरी।। [4]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (380)

दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण की आरती करें, एवं अपने तन, मन और धन का पूर्ण रूप से समर्पण करें। [1]

गौर श्याम रंग के सुंदर मुख को निहार कर ही अपना जीवन व्यतीत करें एवं नित्य ही अपने नयनों से इस रूप सौंदर्य [प्रेम स्वरूप] का पान करें । [2]

कोटि कोटि सूर्य एवं चंद्र को दिव्य दंपति के बदन की शोभा पर नयौछावर कर दीजिए, जिन्हें दर्शन से मेरा मन मंत्र मुग्ध [लुभा] हो रहा है  । [3]

श्री परमानंद दास नंदलाल श्री कृष्ण एवं वृषभानु किशोरी श्री राधा की अविचल जोड़ी की स्तुति कर रहे हैं । [4]