सेयं प्राप्तिः कोटीचिन्तामणीनां - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.10)

सेयं प्राप्तिः कोटीचिन्तामणीनां - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.10)

सेयं प्राप्तिः कोटीचिन्तामणीनां सेयं तृप्तिः कोटी पियूष पानात्।
सेयं सम्यग् भक्ति सन्मुक्ति कोटी- र्यच्छ्री वृन्दारण्य आत्मार्पणेच्छा।।

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.10)

श्रीवृन्दावन को आत्मसमर्पण करने की इच्छा करना ही कोटि चिन्तामणियों की प्राप्ति के समान है एवं कोटि अमृत पान से भी अधिक तृप्तिदायक है तथा सम्यक् भक्ति क्या कोटि मुक्तियों की प्राप्ति कर लेना है।