छूट गये व्रत नैम - ब्रज के सेवैया

छूट गये व्रत नैम - ब्रज के सेवैया

छूट गये व्रत नैम धर्म, और छूट गई सब पूजा। [1]
तुम सों नेह लगाय लाडली, अब आंख ना आवै दूजा॥ [2]
मैं तो बरसाने के पौड़े चल दी, मोहे और पंथ ना सूझा। [3]
भानुदुलारी हाथ धरौ सिर, प्यारी यह मग तुम्हरा बूझा॥ [4]

- ब्रज के सेवैया

हे किशोरी श्री राधा! जब से मैंने आपकी शरण ली है, तब से व्रत, नियम, धर्म और अन्य देवताओं की पूजा सब त्याग दी है। [1]

हे लाडिली जू, अब तो मैंने आपसे ही नेह लगा लिया है, अब मेरी आँखों में कोई दूसरा भूलकर भी नहीं आ सकता। [2]

मैं तो बरसाने की सीढ़ियों की ओर चल पड़ी हूँ, मुझे अब कोई और मार्ग नहीं सूझता। [3]

हे भानुदुलारी, अब तो मेरे सिर पर अपना दिव्य हस्तकमल रख दो, अब केवल आपकी ओर जाने वाले मार्ग पर ही चल रही हूँ। [4]