बाँकी अदा पै मैं बलिहारी - श्री ललित माधुरी

बाँकी अदा पै मैं बलिहारी - श्री ललित माधुरी

(राग सोरठ)
बाँकी अदा पै मैं बलिहारी।
बाँकी पाग, केस-लट बाँकी, बाँकि मुकुट-छबि प्यारी।। [1]
बाँकी चाल, बाँकिहीं चितवनि, बाँकि मुरलिका धारी।
कहँलौं 'ललितमाधुरी' बरनौं, आपहिं बाँकेबिहारी।। [2]

- श्री ललित माधुरी

मैं श्री बाँके बिहारी की बाँकी (टेढ़ी) अदा पर बलिहारी जाता हूं। श्री बाँके बिहारी की पगड़ी भी बाँकी है, केश लटें भी बाँकी (तिरछी) है एवं मुकुट की छवि भी बाँकी ही है। [1]
बाँके बिहारी की चाल भी बाँकी है, चितवन भी बाँकी है एवं कर में धारण मुरली भी बाँकी है। श्री ललित माधुरी जी कहते हैं कि मैं कहां तक वर्णन करूं वह स्वयं ही बाँकी बिहारी हैं। [2]