12 वीं शताब्दी में दक्षिण भारत के एक प्रसिद्ध संत जिन्हें श्री बिल्व मंगल ठाकुर के नाम से जाना जाता था, उन्होंने वृंदावन में इसी स्थान पर भजन किया एवं यहाँ पर ही उनकी समाधी भी है । यह स्थान गोपीनाथ बाजार में, श्री गोपीनाथ मंदिर के पास स्थित है।
ऐसा माना जाता है वृंदावन के मार्ग में, उन्होंने अपनी आँखों को फोड़ दिया था क्यूंकि यह वृन्दावन के रास्ते में एक महिला में आसक्त हो गयी थी। वह आध्यात्मिक मार्ग में किसी सांसारिक वस्तु से विचलित नहीं होना चाहते थे । ऐसा माना जाता है इसके बाद स्वयं भगवान श्री कृष्ण उन्हें वृंदावन तक ले आये थे। उन्होंने वृंदावन में शुद्ध मन से भजन किया और इसी स्थान पर कृष्ण कर्णामृतम नामक ग्रन्थ लिखा।
ऐसा माना जाता है वृंदावन के मार्ग में, उन्होंने अपनी आँखों को फोड़ दिया था क्यूंकि यह वृन्दावन के रास्ते में एक महिला में आसक्त हो गयी थी। वह आध्यात्मिक मार्ग में किसी सांसारिक वस्तु से विचलित नहीं होना चाहते थे । ऐसा माना जाता है इसके बाद स्वयं भगवान श्री कृष्ण उन्हें वृंदावन तक ले आये थे। उन्होंने वृंदावन में शुद्ध मन से भजन किया और इसी स्थान पर कृष्ण कर्णामृतम नामक ग्रन्थ लिखा।

