वृंदावन वृंदाविपिन, वृंदा कानन ऐन।
छिन-छिन रसना रटौ कर, वृंदावन सुख दैन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (75)
हे जिह्वा! तू हर क्षण ‘वृन्दावन, वृन्दाविपिन, वृन्दाकानन’—इन परम सुखद, सुख-स्वरूप श्रीधाम के मधुर नामों को ही रट।
छिन-छिन रसना रटौ कर, वृंदावन सुख दैन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (75)
हे जिह्वा! तू हर क्षण ‘वृन्दावन, वृन्दाविपिन, वृन्दाकानन’—इन परम सुखद, सुख-स्वरूप श्रीधाम के मधुर नामों को ही रट।

