(राग धनाश्री)
पीरे कुन्डल पीरे नूपुर पीरो पीताम्बर ओढ़े ठाड़ो।
पीरी बरनी कटि काछनी लाल की पीरो छोर रच्यो पटका को।। [1]
पीरे लकुट मुकुट कर सोहे पीरी खोर दियो छिन गारो।
गोविन्द प्रभु की शोभा जो निरखो पीरोई नन्दन नन्द दुलारो।। [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
आज श्री कृष्ण पीले कुंडल, पीले नूपुर एवं पीला ही पीताम्बर ओढ़ कर खड़े हैं । उनकी कटि काछनी भी पीली है जिसके पट का छोर भी पीला है । [1]
श्री कृष्ण ने पीले ही रंग का मुकुट धारण किया हुआ है, पीले ही रंग की लकुटी हाथ में है, एवं पीले ही रंग का तिलक भी माथे पर लगा हुआ है ।श्री गोविन्ददास जी कहते हैं कि मेरे प्रभु की आज की छवि तो देखो पूर्ण रूप से पीली घटा छाई हुई है । [2]

