तन झूठो मन झूठ है, झूठो यह संसार।
रंग महल में बिहारी बिहारिनि, निश्चय यह उरधार॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (36)
श्री ललित मोहिनी देव कहते हैं— ‘यह शरीर झूठा (नश्वर) है और यह मन भी झूठा (भ्रमित) है। इसलिए हे साधक! अपने हृदय में यह दृढ़ विश्वास धारण कर कि रंग-महल में श्री श्यामा-श्याम विराजमान हैं, और हमें उन्हीं को लाड़ लड़ाना है।’

