मान लो पतित आपु कहँ कह बामा।
बन ठन के जनि जाओ ढिंग श्यामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (37)
यदि तुम स्वयं को पतित स्वीकार कर श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ तो तुम्हारा काम बन जाए। बनना ठनना [पतित होते हुए स्वयं को पतित न मानना] त्याग कर जैसे हो वैसे ही श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ।
बन ठन के जनि जाओ ढिंग श्यामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (37)
यदि तुम स्वयं को पतित स्वीकार कर श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ तो तुम्हारा काम बन जाए। बनना ठनना [पतित होते हुए स्वयं को पतित न मानना] त्याग कर जैसे हो वैसे ही श्री श्यामा ज़ू की शरण में जाओ।

