विनय करूँ कर जोर, रसिक जनन के चरण में।
‘नारायण' चितडोर, लगी रहे नित युगल पद॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मान लीला दोहावाली (1)
मैं रसिक जनों के चरणों में हाथ जोड़कर विनय करता हूँ कि वे मुझ पर ऐसी कृपा करें, जिससे मेरे हृदय में नित्य ही युगल-चरणों का स्मरण और अनुराग बना रहे।
‘नारायण' चितडोर, लगी रहे नित युगल पद॥
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, मान लीला दोहावाली (1)
मैं रसिक जनों के चरणों में हाथ जोड़कर विनय करता हूँ कि वे मुझ पर ऐसी कृपा करें, जिससे मेरे हृदय में नित्य ही युगल-चरणों का स्मरण और अनुराग बना रहे।

