प्रकट भई रावल श्री राधा - श्री द्वारकेश जी

प्रकट भई रावल श्री राधा - श्री द्वारकेश जी

(राग विलावल)
प्रकट भई रावल श्री राधा।
भादों सुदि आठे अनुराधा प्रीति योग स्वरूप अगाधा॥ [1]
तब वृषभान दान बहु दीनों जाचक की सब पूजी साधा।
द्वारकेश की स्वामिनी अद्भुत द्विदल मूल रसकी यह आधा ॥ [2]

- श्री द्वारकेश जी

श्री राधा भाद्रपद माह के अनुराधा नामक नक्षत्र में रावल में उज्ज्वल आठवें दिन प्रकट हुई हैं। वह साक्षात प्रेम एवं सौंदर्य का अवतार हैं । [1]

उनके पिता श्री वृषभानु जी ने उनके प्राकट्य की ख़ुशी में बहुत दान किया एवं जिसने भी जो भी माँगा उसकी वह इच्छा पूर्ण की। श्री द्वारकेशजी कहते हैं, “मेरी स्वामिनी श्री राधा रस की मूल स्त्रोत एवं आधार हैं”। [2]