हौं बलिहारी भक्तकी - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (64)

हौं बलिहारी भक्तकी - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (64)

हौं बलिहारी भक्तकी, कर्यौ बहुत उपकार।
हरि सो धन हिरदै धर्यौ, छुटा दियौ संसार॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (64)

मैं उन भक्तों पर बलिहार जाता हूँ, जिनके महान उपकार हैं; वे हृदय में हरि-रूपी धन को स्थापित कर देते हैं और संसार से वैराग्य उत्पन्न करा देते हैं।