प्रेम-सार सुख-सार है - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (170)

प्रेम-सार सुख-सार है - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (170)

प्रेम-सार, सुख-सार है, रूप-सार रस-सार।
श्रीललितकिसोरी प्रान है, निरवधि नित्य विहार॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (170)

(प्रेम-धाम श्रीवृन्दावन में) निरन्तर चलता रहने वाला यह नित्य-विहार प्रेम का सार है, सुख का सार है, रूप-सौन्दर्य का सार है और रस का भी सार है। यही नित्य-विहार ललितकिशोरीदास (अथवा प्रिया-प्रियतम एवं स्वामी हरिदास जी) का भी प्राण-सर्वस्व है।